चीन को तैवान पर हमला करना ही पड़ेगा – कम्युनिस्ट हुक़ूमत के वरिष्ठ नेता की धमकी

बीजिंग – ‘शांति के मार्ग से तैवान पर कब्ज़ा करने की चीन की कोशिशें शुरू थीं और य कोशिशें इसके आगे भी जारी रहेंगी। लेकिन, तैवान के अलगाववादियों के आंदोलन को यदि रोकना है, तो चीन को तैवान पर हमला करना ही पड़ेगा’, ऐसी धमकी चीन की कम्युनिस्ट हुक़ूमत के प्रभावी अधिकारी ने दी है। उसीके साथ, चीन का लष्कर तैवान के स्वतंत्रता का अंदोलन कुचलने के लिए सिद्ध होने की धमकी चीन के वरिष्ठ लष्करी अधिकारियों ने दी। चीन से ऐसीं धमकियाँ दी जा रहीं है, लेकिन तैवान की सरकार ने, ‘हमारी जनता कभी भी तानाशाही का स्वीकार नहीं करेगी और हिंसा के सामने गर्दन नहीं झुकायेगी’, ऐसा स्पष्ट रूप में बयान किया है।

सन २००५ में चीन ने लागू किये कथित (सो-कॉल्ड) विघटनवादविरोधी क़ानून को पंद्रह साल पूरे हो चुके हैं। इस पृष्ठभूमि पर चीन की कम्युनिस्ट हुक़ूमत ने शुक्रवार को एक विशेष बैठक का आयोजन किया था। इस बैठक में कम्युनिस्ट पार्टी के तीसरे नंबर के नेता होनेवाले ली झान्शू ने ठेंठ तैवान पर हमला करने का प्रस्ताव रखा। वहीं, १५ साल पहले लागू किये गए विघटनवादविरोधी क़ानून के अनुसार, लष्करी कार्रवाई करके तैवान पर हमला किया जा सकता है, ऐसी सलाह इस समय चीन के रक्षादलप्रमुख ‘ली जाऊचेंग’ ने भी इस बैठक में दी। ‘तैवान की स्वतंत्रता की माँग करनेवालीं ताकतें और उनके समर्थन में ख़ड़े रहनेवाले विदेशी लष्कर से चीन को बहुत बड़े ख़तरे की संभावना है। इसी कारण, तैवान का स्वतंत्रता के आन्दोलन को कुचलने के लिए चीन का लष्कर पूरी तैयारी के साथ सिद्ध है’, ऐसा भी रक्षादलप्रमुख जाऊचेंग ने इस समय कहा।

इसी बीच, पूरी दुनिया कोरोनावायरस के संक्रमण का मुकाबला करने में व्यस्त होते समय, तैवान पर आक्रमण करने का बेहतरीन मौक़ा अपने पास होने का दावा चीन के पूर्व लष्करी अधिकारी ने किया है। तैवान की रक्षा के लिए वचनबद्ध होनेवाली अमरीका के, इस क्षेत्र कें युद्धपोतों पर के सैनिक कोरोना से संक्रमित हुए हैं, इस बात की ओर चीन के इन पूर्व अधिकारी ने निर्देश किया था। इसीका फ़ायदा उठाकर चीन तैवान पर कब्ज़ा करें, ऐसी सलाह इस अधिकारी ने दी थी। वहीं, चीन के लष्करी विश्लेषकों ने, सन २००५ में कम्युनिस्ट हुक़ूमत ने बनाये क़ानून का संदर्भ देकर, तैवान पर हमला करना उचित ही है, ऐसा कहा था। वहीं, दो दिन पहले चीन के राष्ट्राध्यक्ष जिनपिंग ने अपने लष्कर को युद्ध के लिए तैयार रहने के आदेश दिये थे। उसके बाद की बैठक में चिनी नेता और लष्करी अधिकारियों ने, तैवान पर कब्ज़ा करने के लिए लष्करी कार्रवाई की भाषा शुरू की होकर, इसके ज़रिये तैवान पर दबाव बढ़ाने की कोशिश चीन द्वारा की जा रही है।

चीन द्वारा दी जा रहीं आक्रमण की धमकियों का तैवान की सरकार ने क़रारा जवाब दिया है। चाहे कुछ भी हो, तैवान की जनता  तानाशाही का स्वीकार नहीं करेगी और हिंसा के सामने गर्दन नहीं झुकायेगी, ऐसा ही तैवान की सरकार ने डटकर कहा है। चीन के आक्रमण की संभावना को मद्देनज़र रखते हुए तैवान ने बहुत पहले से ही लष्करी सिद्धता की है। पिछले कुछ दिनों में, अमरीका ने भी तैवान को अत्याधुनिक शस्त्रास्त्र और रक्षासामग्री की सप्लाई करने की गतिविधियाँ शुरू कीं हैं। तैवान के पीछे अमरीका की लष्करी ताकत खड़ी है, इसका पूरा एहसास चीन को हुआ है। इस कारण चीन फिलहाल तो तैवान पर लष्करी कार्रवाई करने का विचार नहीं कर सकता।

फिर भी तैवान को बार बार लष्करी कार्रवाई की धमकियाँ देकर चीन, तैवान की आज़ादी के लिए चल रहे प्रयासों को रोकने की कोशिश कर रहा है। लेकिन कोरोनावायरस के संकट के लिए ज़िम्मेदार होनेवाले चीन के विरोध में दुनियाभर में महौल ग़र्म हुआ होकर, तैवान इसका लाभ उठाकर अपनी आज़ादे की माँग अधिक आक्रमक रूप में आगे रख रहा है। अमरीका तथा अन्य पश्चिमी देश इस मोरचे पर तैवान की सक्रिय सहायता करने लगे हैं। यह चीन के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात साबित हो रही है।

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