‘वुहान लॅब लीक थिअरी’ को नकारकर अमरीका ने गलती की – अमरीका की पूर्व विदेश मंत्री कॉन्डोलिसा राईस

वॉशिंग्टन – ‘‘‘वुहान लॅब लीक थिअरी’ को नकार कर अमरीका ने बहुत बड़ी गलती की है। यह गलती मानकर अब अमरीका चीन के बारे में आक्रामक भूमिका अपनाएँ। अमरीका को इस महामारी की जाँच के लिए सहयोग करने हेतु चीन को मजबूर करना होगा। चीन अगर इस बारे में सहयोग करके पारदर्शिता ना दिखाएँ, तो यह मसला संयुक्त राष्ट्र संघ में उपस्थित करने की तैयारी अमरीका रखें’, ऐसा अमरीका की पूर्व विदेश मंत्री कॉन्डोलिसा राईस ने कहा है। उसी समय, कोरोना के संदर्भ में पूर्व राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनाई भूमिका उचित ही होने की बात साबित हुई, ऐसी राईस ने लगाई।

‘वुहान लॅब लीक’, कॉन्डोलिसा राईस

अमरीका में कोरोना के मृतकों की संख्या छह लाख के भी पार हो चुकी है। ऐसी परिस्थिति में, कोरोना की महामारी यानी चीन ने छेड़ा हुआ जैविक युद्ध ही है, यह स्पष्ट करनेवाले सबूत और जानकारी माध्यमों में जारी हो रही है। इससे ‘वुहान लॅब लीक थिअरी’ के यानी कोरोना का वायरस चीन की वुहान लैब से ही फैलाया गया होने के दावे की पुष्टि हो रही है। इस कारण कोरोना का वायरस नैसर्गिक होने के दावे करनेवाले अमरीका के स्वास्थ्य विषयक सलाहकार और संशोधक तथा माध्यम मुश्किल में फँसे हैं। अमरीका की पूर्व विदेश मंत्री कॉन्डोलिसा राईस ने भी यह फटकार लगाई है कि ‘वुहान लॅब लीक थिअरी’ को नकारकर अमरीका ने बहुत बड़ी गलती की। इस बारे में बहुत ही जल्दबाज़ी से निष्कर्ष दर्ज किया गया, लेकिन अब इस संदर्भ में सबूत हमारे सामने आ रहे हैं, यह बताकर राईस ने इसके लिए अमरीका के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही माध्यमों को भी खरी खरी सुनाई।

चीन की वुहान लैब का मुआयना करके आए अमरिकी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने, यहाँ की व्यवस्था निम्न दर्जे की होने का निरीक्षण दर्ज किया था। साथ ही, इस स्थान में बहुत कुछ शुरू होने के संकेत भी मिल रहे थे। फिर भी इसकी जाँच नहीं की गई। इसके लिए अमरीका के वरिष्ठ अधिकारियों समेत माध्यम भी जिम्मेदार हैं, ऐसा राईस ने कहा। डोनाल्ड ट्रम्प ने कोरोना के संदर्भ में अपनाई भूमिका उचित ही थी। उन्होंने कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए चीन के साथ की हवाई सेवा पर रोक लगाने का निर्णय किया था। लेकिन उस समय इस फैसले को ‘वंशविद्वेषी’ करार देकर उसकी आलोचना की गई थी, इसकी याद भी राईस ने करा दी।

‘वुहान लॅब लीक’, कॉन्डोलिसा राईस

कोरोना के संदर्भ में हुई इस गलती को मानकर अमरीका ने अब इनके बारे में अधिक आक्रामक भूमिका अपनाने की आवश्यकता है, ऐसी सलाह कॉन्डोलिसा राईस ने बायडेन प्रशासन को दी। जागतिक स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना की जाँच के लिए भेजें पथक ने कहाँ जाँच करनी है और कहाँ नहीं, इसपर चीन ने नियंत्रण रखा था। यह सबकुछ अमरीका ने इससे पहले बर्दाश्त किया। लेकिन अब अमरीका को कोरोना की जाँच के लिए सहयोग करने हेतु चीन को मजबूर करना होगा। इस संदर्भ में अगर चीन पारदर्शी भूमिका नहीं अपनाता, तो अमरीका को चाहिए कि वह संयुक्त राष्ट्र संघ में यह मसला उपस्थित करें, ऐसा कहकर राईस ने चीन के साथ बायडेन प्रशासन पर भी दबाव बढ़ाया है।

इसी बीच, चीन यह अमरीका का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी बना है, यह बात भी कॉन्डोलिसा राईस ने मान्य की। किसी जमाने में अमरीका का प्रतिद्वंद्वी होनेवाले सोवियत रशिया से भी चीन अधिक प्रबल है, इसपर राइस ने गौर फरमाया। सोवियत रशिया हालाँकि लष्करी दृष्टि से सामर्थ्यशाली था, फिर भी तंत्रज्ञान और आर्थिक दृष्टि से अमरीका से बहुत ही पिछड़ा हुआ था। लेकिन वर्तमान चीन वैसा नहीं है। चीन तंत्रज्ञान और आर्थिक दृष्टि से प्रबल है, ऐसे गिने-चुने शब्दों में राईस ने चीन से अमरीका को संभवतः होनेवाला खतरा अधोरेखांकित किया।

अमरिकी न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में कॉन्डोलिसा राईस ने चीन के बारे में यह चेतावनी दी। उसके कुछ दिन पहले कॉन्डोलिसा राईस ने डोनाल्ड ट्रम्प के बारे में गौरतलब बयान किए थे। जागतिकीकरण की प्रक्रिया में हमें पूरी तरह नज़रअंदाज किया गया, ऐसा माननेवाले अमरीका के समाज गुट को डोनाल्ड ट्रम्प ‘अपने’ नेता प्रतीत हो रहे थे, उनके साथ ट्रम्प ने अच्छी तरह संवाद स्थापित किया था, ऐसा निरीक्षण राईस ने दर्ज किया। राजनीतिक अभ्यासक के तौर पर मैं उसकी ओर बहुत ही बारीकी से देख रही थी, ऐसा कहकर राईस ने, डोनाल्ड ट्रम्प की राजनीति की ओर तुच्छतापूर्वक देखनेवालों को खरी-खरी सुनाई ।

चीन को चुनौती देनेवाले डोनाल्ड ट्रम्प को चुनाव में परास्त करने के लिए ही चीन ने कोरोना की महामारी फैलाने का आरोप अमरीका में शुरू हुआ है। कोरोना की महामारी के बारे में अब सामने आ रही जानकारी अगर सालभर पहले सामने आती, तो ट्रम्प फिर एक बार अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष बन जाते, ऐसा एक ही दिन पहले सिनेटर लिंडसे ग्रॅहम ने कहा था। क्योंकि अमरीका के विरोध में जैविक युद्ध छेड़नेवाले चीन को दृढ़तापूर्वक कौन प्रत्युत्तर दे सकता है, यह सवाल उस समय अमरिकी जनता के सामने आ चुका होता, ऐसा ग्रॅहम ने कहा था।

बहुत ही सटीक एवं सूचक शब्दों में अपनी भूमिका रखने के लिए मशहूर होनेवालीं कॉन्डोलिसा राईस के बयान से भी यही बात ध्वनित हो रही है। इसी कारण, चीन ने अगर कोरोना की जाँच के संदर्भ में सहयोग नहीं किया, तो यह मुद्दा संयुक्त राष्ट्र संघ में उपस्थित करने की राईस ने की माँग बहुत ही अहम साबित होती है।

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