काबुल हवाई अड्डे पर हुए दो आत्मघाती विस्फोट – ४० की मौत, १२० गंभीर घायल

काबुल हवाई अड्डे पर हुए दो आत्मघाती विस्फोट – ४० की मौत, १२० गंभीर घायल

काबुल – अफ़गानिस्तान की राजधानी काबुल के हवाई अड्डे पर हुए दो आत्मघाती विस्फोट से ४० की मौत हुई और १२० से अधिक घायल हुए हैं। इनमें से आधे से अधिक घायलों की स्थिति काफी चिंताजनक होने की जानकारी सामने आयी हैं। अफ़गानिस्तान तालिबान के कब्ज़े में जाने के कारण विदेशी नागरिक एवं सैनिक अफ़गानिस्तान छोड़ने की तैयारी में हैं और इसी दौरान हुए इन हमलों की वजह से पूरा विश्‍व दहल उठा है। कुछ विश्‍लेषकों ने तो इस हमले की तुलना ९/११ के हमले से की है। लेकिन, इन आत्मघाती हमलों का ज़िम्मा अभी किसी भी आतंकी संगठन ने स्वीकारी नहीं है।

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अमरीका, ब्रिटेन और जर्मनी ने अफ़गानिस्तान के काबुल हवाई अड्डे पर आतंकी हमला होने का इशारा दिया था। यह इशारा सच साबित हुआ है और काबुल हवाई अड्डे पर दो आत्मघाती हमले करके आतंकियों ने पूरे विश्‍व को दहला दिया है। इन विस्फोट में महिलाएं और बच्चे भी मृत होने की जानकारी साझा की गई है। साथ ही मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारी साझा की जा रही है। काबुल हवाई अड्डे के ऐब्बे गेट के करीब पहला विस्फोट हुआ। इसके कुछ ही मीनिटों बाद हवाइ अड्डे के करीबी बैरॉन होटल के पास दूसरा विस्फोट हुआ। यह दोनों आत्मघाती हमले ही थे, यह जानकारी तालिबान ने साझा की है। रशिया के विदेश मंत्रालय ने भी इसकी पुष्टी की है।

इन दोनों विस्फोटों के बीच गोलीबारी होने की जानकारी भी कुछ पत्रकारों ने साझा की है। लेकिन, इसकी पुष्टी नहीं हो सकी है। इन दो विस्फोटों में से एक को आत्मघाती हमलावर ने अंजाम दिया था, इसकी पुष्टी होने का बयान अमरीका के दो अफसरों ने किया है। साथ ही बैरॉन होटल के करीब हुआ विस्फोट अमरिकी सैनिकों को लक्ष्य करने के लिए ही किया गया, क्योंकि अमरिकी सैनिक ही इस होटल में रह रहे हैं, यह बात इन अफसरों ने स्पष्ट की।

यह विस्फोट वहां पर उमड़ी भीड़ में ही हुआ, ऐसा तालिबान का कहना है। इसके भयंकर फोटो माध्यमों ने जारी किए हैं। इसके बाद काबुल हवाई अड्डे पर भगदड़ मची थी। अपने नागरिकों को स्वदेश पहुँचाने में व्यस्त अमरीका एवं अन्य देशों के सामने इससे नई चुनौती खड़ी हुई है। तालिबान ने इस विस्फोट के लिए अमरीका और पश्‍चिमी देश ही ज़िम्मेदार होने की आलोचना की है। इस वजह से अफ़गानिस्तान में सुरक्षा की स्थिति अधिक संवेदनशील बन गई है और फ्रान्स के राष्ट्राध्यक्ष इमैन्युएल मैक्रॉन ने अफ़गानिस्तान में स्थित अपने राजदूत को वापिस बुलाने का वृत्त हैं।

इसी बीच, इन आत्मघाती हमलों के बाद अमरीका के राष्ट्राध्यक्ष ज्यो बायडेन पर दबाव अधिक बढ़ा है। काबुल के हवाई अड्डे पर उमड़ी भीड़ बायडेन प्रशासन की लापरवाही का परिणाम है, ऐसी आलोचना अमरीका में हो रही है। यूरोपिय देश इस पर नाराज़गी जता रहे हैं और हाल ही में हुई ‘जी ७’ की ‘वर्चुअल’ बैठक में इसकी गूँज सुनाई दी थी। ३१ अगस्त तक अमरीका एवं अन्य देशों की सेनाएं और नागरिकों को अफ़गानिस्तान से हटाना नामुमकिन है, इस बात का अहसास ‘जी ७’ के अन्य सदस्य देशों ने बायडेन को कराया। लेकिन, उन्होंने इसके लिए अधिक समय देने से इन्कार किया।

तालिबान ने ऐसा धमकाया था ३१ अगस्त के बाद एक भी विदेशी नागरिक अफ़गानिस्तान बर्दाश्‍त नहीं करेंगे। तालिबान के इस इशारे का बायडेन १०० प्रतिशत पालन करके अपने सहयोगी देशों को मुँह के बल गिरा रहे हैं, ऐसी आलोचना होने लगी है। ऐसी स्थिति में काबुल हवाई अड्डे पर हुए हमले अमरीका के लिए नई चुनौती हैं। तालिबान के आतंक की वजह से अफ़गानिस्तान छोड़कर बाहर जाने के लिए जान की बाज़ी लगा रहे हज़ारों लोग काबुल हवाई अड्डे पर अपनी रिहाई की प्रतिक्षा में हैं। इनमें विदेशी नागरिकों के साथ ही अफ़गान नागरिकों का भी समावेश है। इसके आगे अफ़गान नागरिकों को देश छोड़कर जाने की अनुमति नहीं देंगे, ऐसा कहकर तालिबान ने इस हवाई अड्डे के बाहर अफ़गान नागरिकों से मारपीट करके उन्हें वापिस लौटने का निर्देश दिया है। फिर भी जान की परवाह किए बगैर अफ़गान नागरिक इस हवाई अड्डे में प्रवेश करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं।

ऐसी स्थिति में अपने नागरिक और सैनिकों को हटाने के दौरान इस हवाई अड्डे की सुरक्षा की चुनौती भी अमरीका और अन्य देशों को संभालनी पड़ेगी।

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