चीन का उदय १९३० के दशक के नाज़ी जर्मनी से मिलता जुलता – ऑस्ट्रेलिया के रक्षामंत्री पीटर डटन

कॅनबेरा – ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच तनाव और भी बिगड़ता चला जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया के रक्षामंत्री ने एक कार्यक्रम के दौरान, चीन की वर्चस्ववादी हरकतों पर गौर फरमाते समय, उसकी तुलना १९३० के दशक के नाज़ी जर्मनी के साथ की है। कुछ ही दिन पहले चीन के प्रवक्ता ने, दो देशों के संबंध बिगड़ने के लिए ऑस्ट्रेलिया की मानसिकता ज़िम्मेदार होने का दोषारोपण किया था। इस पृष्ठभूमि पर, ऑस्ट्रेलियन रक्षामंत्री का बयान गौरतलब साबित होता है।

नाझी, नाज़ी जर्मनी

ऑस्ट्रेलिया के चारों ओर के क्षेत्र में परिस्थिति दिन-ब-दिन अधिक से अधिक पेचींदा होती चली जा रही है। इसे दूसरे विश्वयुद्ध के पश्चात के दौर की सबसे अनिश्चित स्थिति कहा जा सकता है। चीन की सत्ताधारी हुकूमत के अधिकारियों के बयान तथा बर्ताव अधिक से अधिक बेलगाम और आक्रामक होते चले जा रहे हैं। दूसरों का नुकसान करके अपना फायदा करने की मानसिकता में से यह बात घटित होती हुई दिख रही है। यह भू-राजनीतिक स्थिति १९३० के दशक से मिलती-जुलती होकर, चीन का उदय उस दशक की नाज़ी जर्मनी के साथ समानता दर्शानेवाला है’, ऐसी चेतावनी ऑस्ट्रेलिया के रक्षामंत्री पीटर डटन ने दी।

बुधवार को ‘अमेरिकन चेंबर ऑफ कॉमर्स इन ऑस्ट्रेलिया’ ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। आनेवाले कुछ हफ्तों में ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री तथा विदेश मंत्री अमरीका का दौरा करनेवाले हैं। इस दौरे की पृष्ठभूमि पर, दो देशों के संबंध और चीन के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उसमें ऑस्ट्रेलिया और अमरीका का मोरचा तथा ऑस्ट्रेलिया की रक्षा सिद्धता इन मुद्दों पर बात करते समय रक्षा मंत्री डटन ने चीन की तुलना नाज़ी जर्मनी से की।

नाझी, नाज़ी जर्मनी

चीन पिछले कई दशकों से कानून और नियमों पर आधारित अन्तर्राष्ट्रीय व्यवस्था का फ़ायदा उठा रहा था। लेकिन अब वही इस व्यवस्था को तहस-नहस करने के लिए हरकतें कर रहा है’, ऐसा गंभीर आरोप ऑस्ट्रेलियन रक्षा मंत्री ने किया। रक्षा मंत्री डटन से पहले, ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी कॅरोलिन मिलर ने चीन की तुलना १९९० से पहले के रशियन संघराज्य के साथ की थी।

चीन को ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार देश के रूप में जाना जाता है। लेकिन पिछले दो सालों में, ऑस्ट्रेलिया और चीन के संबंध तेज़ी से बिगड़ने की शुरुआत हुई है। चीन द्वारा ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न क्षेत्रों में प्रभाव बढ़ाया गया होकर, उसके बल पर हस्तक्षेप भी शुरू हुआ है। इस हस्तक्षेप को रोकने के लिए ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और सरकार ने तेज़ी से आक्रमक फैसले करना शुरू किया है। उसी समय कोरोना की महामारी, ५जी तंत्रज्ञान, साऊथ चाइना सी, व्यापारी दबाव, ताइवान ऐसे कई मुद्दों पर ऑस्ट्रेलिया के नेतृत्व द्वारा ठोस भूमिका अपनाई जा रही है। रक्षा मंत्री डटन का बयान भी उसी का भाग दिखाई दे रहा है।

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